एक चिंगारी

एक चिंगारी

इतनी कम उम्र, में इतनी ज्यादा विफलताओं का सामना करना वो भी तब जब उसने कभी कोई कठिनाई ही न देखी हो, उसे अंदर तक झकझोरने वाला था। उसे तो ये भी लगने लगा था की उसके ज़िंदगी में कुछ बचा ही नहीं है शायद इसीलिए उसने अपनी ज़िंदगी की कहानी खत्म करने के बारे में सोच भी लिए था, सोचा क्या था, पंखे से लटकने ही जा रहा था की उसके ‘खरुश और प्यारे’ पापा का फ़ोन आ गया !वही पापा जिनके नाम से ही उसे डर लगता था, तभी उसने सोचा की एक अंतिम बार बात कर ही लिया जाये, एक और अंतिम डांट, अंतिम…!!!  आखिर समाज में पापा की नाक भी तो उसी ने ही कटवाई है और वो सोच भी रहा था की समाज में सीना तान कर चलने वाले उसके पापा पे क्या बीत रही होगा, और आखिर हुआ भी तो ये उसी के कारण था. एक समय था जब पापा उसका नाम लेने से नहीं थकते थे कि मेरा बेटा एक दिन ये करेगा वो करेगा और कहते है न की पूत के लक्षण पालने में हे दिख जाता है, उसने किया भी तो ऐसा ही था, हरेक जगह प्रतियोगिता में जीतना, और टॉपर तो वो था ही।

फ़ोन पे उदास और मरियल लेकिन फिर भी कड़क आवाज आई जैसे कोई आपने आप को संभल रहा हो, कि बेटा क्यों परेशान हो, दुनिया समाज के बारे में मत सोचो। पैसे मेरे बर्बाद किये है तुमने, और मै कमाता भी किसके लिए हूँ , तम्हारे लिए ही तो, जो करना है करो, बस ख़ुशी से रहना क्योकि इस बूढ़े बाप का सहारा बस तुम ही हो…और कौन है ही मेरा तम्हारे अलावा इस दुनिया में।  उसे विश्वास ही नहीं हो रहा  था की ये उसी के पापा बोल रह थे। क्या ये उनके ही शब्द थे।  वो तो नशा भी नहीं करते फिर ऐसा कैसे बोला उन्होंने, क्या वो नींद में तो नहीं था? आज उसे अपने पापा के दूसरे चेहरे की बारे में पता चला की उसके पापा भी उसे दुसरो के पिता की तरह ही प्यार करते हैं शायद  उस से कही ज़्यदा ही। अच्छा ही किया था उन्होंने की पहले प्यार जताया नहीं, इतने कम प्यार में जब वो इतना बिगड़ सकता है तो ज़्यदा प्यार में उसका क्या होता । अब उसको आज शायद पहली बार उसे अपनी गलती का एहसास हो रहा था ।

तभी उसको उस लड़की की बारे में याद आया जिससे वो बेपनाह प्यार करता था, पर शायद उसे लगता था की वो प्यार नहीं करती उस से । और लगे भी क्यों न राजकुमारी जैसी दिखने वाली लड़की और उसके हजारो राजसी  ठाठ- बाठ वाले आशिक और ये पतला दुबला बीमार सा लगने वाला लड़का और अब तो उसने जो किया था शायद उसके बाद वो कभी बात भी नहीं करती। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की वो ऐसा भी कुछ कर सकता है। खैर जिसने चार सालो में एक बार भी बात करने के कोशिश नहीं किया हो, जिसका अभी कोई अता-पता नहीं हो वो बाद में क्या करेगी इसका कयास लगाना बहुत ही मुश्किल था । लेकिन अब उसके पास जीने के दो-दो बहाने थे, तो उसने भी उसने ठान लिया की उसे अब जीना है ।

इस बात को सालो बीत गए और अब वो एक अच्छे लोगो की श्रेणी में आने लगा  है, उसके पापा का सपना अब पूरा होते हुए दिख रहा है, लेकिन उसे ये समझ में नहीं आया की जीने की चिंगारी उसके मन में उठी कैसे ? ‘‘पापा के फ़ोन से या लड़की की प्रेरणा से”

आज वो जो भी है उसका श्रेय वो किसे दे, आखिर किसके लिए उसने ये सब किया ……… आखिर किसके लिए?  इसमें कही दो राय नहीं की वो हमेशा हरेक जगह  आपने पापा को श्रेय देता है लेकिन क्या उस लड़की का उसके सफलता के पीछे कोई हाथ नहीं था । वो भी तो उसे ऐसा ही बनते  हुए देखना चाहती थी और उसने शुरुआत में पढ़ना भी तो उसके प्यार में ही शरू किया था, उसके  कसम के बाद ही । उस सच्चे प्यार के बाद । उस जिस्म के नहीं बल्कि रूह के प्यार के बाद । हां उसी प्यार के बाद । इस  सवाल का जवाब उसके पास नहीं था  और शायद वो जानना भी नहीं चाहता था, लेकिन एक कसक उसके दिल में रह ही गई थी की किसके लिए ? आखिर किसके लिए, उस दिन वो कुछ करने की चिंगारी जो जली उसके दिल में, आखिर  किसके लिए ?

खैर जानकर भी क्या होता है, उस लड़की कि शादी एक अच्छे  डॉक्टर से हो गई और वो बहुत खुश है…बहुत खुश ।यहाँ लड़के के ज़िंदगी में भी एक नयी रौशनी आ गयी है। एक नया उम्मीद । एक नया एह्साह और वो लिखने बैठ गया.

 

लेखक
एक अजनबी



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