हम इश्क़ में थे तेरे ।

हम इश्क़ में थे तेरे तो डरते थे,
की अब तेरे बिन ठौर बनाना सीख लिया है हमने।।

गर! इश्क़ सच्चा है तुझसे,
तो बेहिसाब ही होगा,
तेरे चाहने ना चाहने से क्या है,
इश्क़ मेरा है, तेरे बाद भी होगा।

 

मदहोशी को ज़माने में मशहूर नशा रंगीन पानी का, 

मैं कुमार! दीदार-ए-हुश्न से ही मदहोश हुआ जाता हुँ|

 

हाँ जनाब! डरता हुँ इस इश्क़ से,
क्युंकि,
हमने देखा है,
कई जिगरी इमारतों को,
इसमे बिखर्ते हुए। 

 

By Gaurav Kumar singh

 

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